–एम0 एस0 चौहान
देहरादून । राजनीति शब्द एवं महत्व की अगर व्याख्या की जाये तो राजनीति चौथी शताब्दी ई0पू0 के यूनानी दार्शनिक अरस्तू द्वारा रचित राजनीतिक दर्शन की एक कीर्ति है ‘निकोमैचेन’’ एथिक्स के अन्त में, अरस्तू ने घोषणा की कि नैतिकता की खोज राजनीति की चर्चा की ओर ले जाती है। अरस्तू को राजनीतिक विज्ञान का जनक कहा जाता है, वे एक यूनानी दार्शनिक थे जिन्होंने राजनीति को एक व्यवस्थित और व्यावहारिक दृष्टि कोंण दिया और उन्होंने 158 संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन भी किया था। जहाँ तक भारतवार्ष की बात की जाये तो कौटिल्य भारतवर्ष के राजनीतिक पिता कहे जा सकते हैं। राजनीतिक शब्दग्रीक शब्द ‘‘पोलिस’’ से आया है जिसका अर्थ है नगर राज्य इसलिए इसका मूल अर्थ नगर राज्य का संचालन या उससे सम्बंधित सभी मामलों से है। देश, काल एवं समाज के सामुहिक नियमों के निर्माण संरक्षण और संशोधन की गतिविधियां निर्णय लेने, शासन और कानून बनाने जैसी प्रक्रियाएं संचालन तथा मानव जाति के स्वस्थ उत्थान के लिए राजनीति अत्यन्त महत्वपूर्ण है परन्तु मौजूदा समय में देश-दुनिया में स्वार्थ पर निजी हितों की पूर्ति हेतु जिस प्रकार की राजनीति देश-दुनिया के राजनेताओं एवं उनके मुखियाओं द्वारा की जा रही है ‘‘बदनामगलियों’’ से बेहतर शब्द शायद दिया जाना बेहतर होता परन्तु इसके लिए अतिरिक्त साहस की आवश्यकता है। देश-दुनिया में विभिन्न राष्ट्रों के शीर्ष प्रतिनिधियों, सत्ताधारी राजनैतिक संगठनों द्वारा जिस प्रकार के राजनीतिक एवं कूटनीतिक पैंथरों का प्रयोग किया जा रहा है वह किसी भी प्रकार से तर्कसंगत एवं व्यावहारिक नहीं कहे जा सकते, मात्र अपने-अपने राजनीतिक हितों व राजनीतिक एजेंडों को जिस प्रकार से देश-दुनिया के राजनेताओं व राजनीतिक संगठनों द्वारा चलाया जा रहा है, अगर इसकी ईमानदारी से समीक्षा की जाये तो ऐसा प्रतीत होता है कि उनके लिए देश-काल, राष्ट्र, समाज से ऊपर उनके राजनेताओं व राजनीतिक संगठनों के हित सर्वोपरि हैं और जिस प्रकार से लोकतांत्रिक राष्ट्रों में भी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को अव्यवस्थित व जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का अतिक्रमण किया जा रहा है इस स्रोतो यह प्रतीत होता है कि दुनिया भर में लोकतांत्रिक व्यवस्थायें हाशिये पर हैं इसके उदाहरण हम अपने पड़ोसी राष्ट्रों पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश में निरन्तर चल रही अस्थिरता के रूप में देख सकते हैं। देश-दुनिया में राजनीति व राजनेताओं का बयाँ हाल है कि कर्तव्य हाशिये पर अधिकार सभी सीमाओं को निजी हित हेतु लांगते दिखते हैं एवं देश-दुनिया में राजनेताओं एवं राजनीतिक संगठनों का निजीस्वार्थ एवं स्वयं को राजनैतिक एजेंडा आसमान छूता दिखता है इससे उनका धैय व जनता के प्रति उनकी जवाबदे ही पर यक्ष प्रश्न उठना लाजमी है परन्तु देश-दुनिया के राजनेता एवं ंराजनैतिक संगठनों द्वारा जिस प्रकार से अपने चारों तरफ सुरक्षा का मन मुताबिक, प्रिय घेरा बनाया हुआ है एवं वह उसमें पर मानद की अनुभूतियाँ ले रहे हैं ऐसे में जवाबदेही की आवश्यकता ही कहां है एवं जनता तक पहुँने वाली सूचनाओं पर भी देश-दुनिया में, देश-दुनिया के राजनेता एवं राजनैतिक संगठनों के बढ़ते अधिकार जनता तक अपनी मनपसंद लुभावनी व अपने राजनैतिक स्वार्थों को सांधने वाली सूचनायें/खबरें पहुँचाते हैं तथा इनके माध्यम से ही जनता का मन बनाते हैं जिससे सही सूचना पाने के अधिकारों पर भी स्वार्थी राजनीति व देश-दुनिया के राजनेता हावी हैं। देश-दुनिया में जिस प्रकार की अप्रिय हलचलें हो रही हैं तथा जंगो में ना जाने कितने बेगुनाह लोग व बच्चे अपना सब कुछ गवाँ रहे हैं बद से बदत्तर हालत में रहने को भूखे-प्यासे, गम्भीर आघातों में भी बिना चिकित्सा, भोजन व पानी के रह रहे हैं व देश-दुनिया के राजनेता व राजनीतिक सोच कितनी विकृत हो गयी है इसका अंदाजा उक्त घटनाओं से लगाया जा सकता है तथा देश-दुनिया में मानव-अधिकारों व लोकतंत्र की हत्या व चल रही जंग एवं शान्ति की पठकथा जिस प्रकार से लिखी जा रहीं हैं उसका फायदा किनको पहुँच रहा है और किसका नुकसान हो रहा है इसका अंदाजा लगाया जाना दुष्कर नहीं है।
