घटता जल का स्तर एक वैश्विक समस्या- स्वामी चिदानन्द सरस्वती

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🛑 इस्राइल दूतावास प्रभारी रोनी येडिडिया-क्लेन और उनके पति, ज्योफ परमार्थ निकेतन से विदा हुये

🟢 दुनिया की सबसे मूल्यवान वाटर तकनीक ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर हुई विस्तृत चर्चा

🔴 परमार्थ निकेतन भारत हमारा दूसरा घर-रोनी येडिडिया

ऋषिकेश । इस्राइल दूतावास प्रभारी रोनी येडिडिया-क्लेन और उनके पति, ज्योफ परमार्थ निकेतन से विदा हुये। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, रोनी येडिडिया और ज्योफ ने दुनिया की सबसे मूल्यवान वाटर तकनीक, ड्रिप वाटर, रिवुलिस इन्डिया और डॉ. आसफ जो कि भूजल जल विज्ञान, पर्यावरण निगरानी, सतही जल और वाटरशेड प्रबंधन आदि के विशेषज्ञ हैं उनकी तकनीक पर भी चर्चा की।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि घटता जल का स्तर एक वैश्विक समस्या है, जिसके लिये दुनिया के सभी राष्ट्रों को एक साथ आना होगा तथा मिलकर कार्य करना होगा। यह समय जल संरक्षण के लिये हर व्यक्ति को जागरूक होने का है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण एवं पुनर्चक्रण के मामलों में इजराइल एक अति उन्नत देश है। वहां पर पानी की कमी के कारण सिंचाई के लिये ड्रिप इरिगेशन पद्धति का उपयोग होता है। बागवानी, खेती, नर्सरी प्रबंधन एवं सिंचाई के लिये इजराइली प्रौद्योगिकी से भारत को भी काफी लाभ हो सकता है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत के पास जल की पर्याप्त उपलब्धता है परन्तु हमें सिंचाई के लिये जल के प्रबंधन के बेहतर तरीकों को अपनाना होगा। जिसप्रकार इजराइल में कृषि, उद्योग, सिंचाई आदि के लिये पुनर्चक्रित जल का उपयोग किया जाता है वैसे ही प्रतिबद्धता के साथ भारत को भी इस ओर विचार करने की जरूरत है। अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग, जल संरक्षण के तरीकों व जल संसाधन प्रबंधन पुनर्चक्रित जल के उपयोग से काफी हद तक जल की कमी को कम किया जा सकता है।
रोनी येडिडिया ने कहा कि परमार्थ निकेतन, भारत हमारे दूसरे घर की तरह है। पूज्य स्वामी जी का सान्निध्य और मार्गदर्शन, उनका विजन अद्भुत है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की नवीन तकनीक पर कार्य करने से इजराइल और भारत बीच बढ़ती भागीदारी और मजबूत होगी। रिवुलिस, का सिंचाई उद्योग में एक समृद्ध इतिहास है, जिसमें 50 से अधिक वर्षों की विशेषज्ञता सूक्ष्म सिंचाई उत्पादों और समाधानों के विकास, निर्माण में विशेष अनुभव है जो कि शुद्धतम प्राकृतिक एवं स्मार्ट सिंचाई योजना है जिसके माध्यम से कम जल में अधिक फसलों का उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगली बार जल विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा कर दुनिया की सबसे मूल्यवान वाटर तकनीक को लागू करने हेतु विस्तृत योजना बनायी जायेगी। उन्होंने परमार्थ निकेेतन गार्डन में ड्रिप सिंचाई प्रणाली का प्रायोगिक परिक्षण भी किया।

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